Sunday, 1 May 2016

कब रूकेंगे ये हमले ?


कब रूकेंगे ये हमले ?
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रह जाए जब 
थोड़ी सी चाह,
छोटी खुशियों, महीन रिश्तों
और थोड़े से शब्दों की !
रूक सकेंगी तभी 
बेवजह होने वाली हत्याएं
अतिरिक्त खुशियों,
रिश्तों और शब्दों की
और रूकेंगे तभी
अदृश्य रूप से
एक दूसरे की आत्माओं पर 
होते हमले भी।


- जसिन्ता केरकेट्टा

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