Thursday, 28 April 2016

किसी ने नहीं देखा मुझे



किसी ने नहीं देखा मुझे
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किसी ने नहीं देखा मुझे
जब आंगन की मिट्टी को
सीमेंट का कवच पहनाया गया

मैं मिट्टी को समझा रहा था

मजबूत नींव के लिए 
जरूरी है उसका मरना,
मगर मैंने देखा 
एक-एक कर 
फूलों को भी मरते हुए।



उस दिन से
मधुमक्खियों ने छोड़ दिया 

मेरे आंगन में उठना-बैठना,

चिडि़यों ने भी मुंह फेर लिया मुझसे,

बारिश और हवा भी 

हंसती नहीं अब खुलकर।

अब आंगन में सिर्फ सन्नाटा

धूप सेंकने आता है

और इसे उनकी नियती बताता रहता है।
मैंने फूलों के साथ-साथ उस दिन

मधुमक्खियों, चिडि़यों की भी हत्या की 

मिट्टी, बारिश और हवा को तड़पाया,

किसी ने नहीं देखा मुझे

सिर्फ मेरे हाथों की सफाई जानती है 

मेरे गुनाह कितने बड़े हैं...।
- जसिन्ता केरकेट्टा

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