Thursday, 28 April 2016

प्रमाण


प्रमाण
............
फूल, पत्ते, गिलहरी
सब जीते हैं अपनी तरह
एक हम ही क्यों हैं नाकाम
मार रहे, मार दिए जा रहे
और लाश की तरह खुद को ढोए
चीखों की ढेर में ढूंढ रहे 
अपने जिंदा होने का प्रमाण !!

- जसिन्ता केरकेट्टा

No comments:

Post a Comment