Thursday, 10 March 2016

अतीत की अस्थियां

अतीत की अस्थियां
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अगर छीन लिया जाए
उससे उसका अतीत
काट दी जाएं, जड़ें समय की

वह छटपटाकर दम तोड़ देगा,
अतीत की अस्थियों से ही
वह बजाता रहता है अपना डंका
मगर देख नहीं पाता
अतीत की अस्थियां हो चुकी हैं
अब जर्जर और खोखली...।


जिन खंडहरों के सहारे
वह चाहता है गढ़ लेना
भविष्य की नींव,
इतिहास की वो खंडहरें
बदल गई हैं ऐसी ईटों में
जो कैद हैं समय के तहखाने में
इसलिए अब वह सिर्फ
इतिहास बांचता है
भूतकाल बेचता है.....।

उखड़ती जड़ें अब
जमीन तलाश रही हैं
ढहती ईटें 
ढूंढ रहीं घर अपना
तरसती हैं दरारें 
पाने को एक झलक
पुरानी तस्वीरों की,

हां, इसलिए हर बार वह
नजर आ जाता है
श्मशान में कुरेदता हुआ
राख के ढेर में 
अपने अतीत की अस्थियां....।

- जसिन्ता केरकेट्टा ।

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