Thursday, 10 March 2016

आकाश में उगते कपास

(pic-Jacinta Kerketta)

आकाश में उगते कपास
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अंतहीन आकाश
बो रहा है कपास।

वो खोज रहा ऐसे हाथों को
जो उजाला उगा सकते हैं
मगर देख रहा
समय की मशीन में
धरती पर कट रहे हैं हाथ
पक चुकी फसलों के साथ।

मिट्टी की परतें 
जिन्हें एक ही रंग के धागे से
सी देना चाहते हैं कुछ हाथ 
वो हाथ, लेदरा सी रही
गांव की स्त्री के हाथों से डरते हैं
क्योंकि लेदरा सीती स्त्री
कपड़ों में फिर से
कपास उगा सकती है
हर रंग को मिला सकती है
धागों की उम्र बढ़ा सकती है,

लेदरा सीती स्त्री के हाथ 
कभी नहीं समझ पाते
कैसे कुछ हाथों में आ जाती है
धरती को छूकर
बंजर करने की शक्ति ?
आदिम नस्लों की बहायी गई 
रक्त के जमीन पर जमे थक्कों से
मिट्टी काली तो फिर हो रही है
सिर्फ नहीं उग रहा तो उनमें
उजाला उगाने का विश्वास
इसलिए जहर उगाने को
कुछ हाथों को है जमीन की तलाश,

असहनीय पीड़ा में 
अपनी धरती को देखकर आकाश
उसकी आंखों में सपने बचा लेने को
निरंतर बदहवास 
उगा रहा है, बादलों पर कपास.... !!

- जसिन्ता केरकेट्टा

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