Thursday, 10 March 2016

सखुआ के सवाल

(Pic By - Jacinta Kerketta)



सखुआ के सवाल
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सखुआ के जंगल
दूर से देख रहे वट वृक्ष को,
कैसे वह खड़ा है 

धरती पर अपने पांव फैलाए
आकाश पर खुद को बिछाए।
उसके नीचे
बैठकें, आकर बैठती हैं देर तक
और विचारती है 
कैसे तलाशी जाए
वट वृक्ष और सखुआ के बीच 
कोई गहरा संबंध,
तब निकलकर आता है एक मंत्र
" वट वृक्ष से जुड़ी हैं सखूआ की जड़े...!!"

सखुआ के जंगल पूछ रहे हैं वट वृक्ष से
क्यों तुम्हारे माथे पर हत्याओं के दाग हैं?
क्यों तुम्हारी ही हथेलियों से छूटती हैं
फांसी के फंदों की रेशाएं?
क्यों तुम जीवित फांसी के तख्ते बन जाते हो?
क्यों वट वृक्ष पर ही लटकाए जाते हैं 
वीर सिदो और तिलका?

वट वृक्ष ताकता है बैठकों की ओर
और बैठकें सखुआ के सवालों को अनसुना कर
निकालती हैं फिर कोई नया रास्ता
जिस पर चलने लगता है
फिर कोई नाटक, दूर तक.....।।

- जसिन्ता केरकेट्टा

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