Thursday, 13 August 2015

एक आदिवासी मैराथन धावक का संघर्ष





" दौड़ " जिसके लिए एक जुनून है। जिसने इस " जुनून " के लिए कभी किसी की परवाह न की। एक जमाने में वो मैराथन रेस दौड़ते थे और पहली बार उन्होंने मैराथन रेस महाराणा प्रताप सिंह के गढ़ आरा में 21 दिसंबर 1974 को दौड़ा था। जिसमें पटना, गया, आरा, रोहतास के धावकों ने हिस्सा लिया था। 1974 में पहली बार एक आदिवासी युवक ने मैराथन में प्रथम स्थान हासिल कर सबको चैकाया था।
1973 में जमशेदपुर के टेल्को ग्राउंड में गोलमोरी बिशप्स हाउस में दरबानी करने वाले महज 20 साल के उस आदिवासी लड़के की दौड़ की चर्चा दूर-दूर तक होने लगी थी। टाटा एसपी उस पांच फीट एक इंच के लड़के की लंबाई दो इंच और बढ़ा कर पुलिस विभाग में लेना चाहते थे। उस लड़के ने पुलिस की नौकरी करने से इंकार कर दिया। उस आदिवासी लड़के की चर्चा जमशेदपुर से लेकर रोहतासगढ़ तक होने लगी थी। तब रोहतास के तत्कालीन पुलिस अधिक्षक बलजीत सिंह ने पुलिस की नौकरी स्वीकार करने के लिए उनके पास सिपाही की वर्दी भेजवाई। तब भी वह पुलिस की नौकरी करना नहीं चाहता था लेकिन गोलमोरी में उन दिनों फादर सी.आर प्रभु, अमेरिकन फादर जोसफ करी, फादर राॅबर्ट करी के प्रोत्साहन से उसने पुलिस की नौकरी अंततः स्वीकार कर ली लेकिन पुलिस में रहकर भी वे एक खिलाड़ी ही रहे।
पुलिस विभाग में रहते हुए उन्होंने हर उस क्षेत्र को ठुकरा दिया जहां बहुत अधिक उपरी आय की संभावनाएं थी। उपरी आय वाले क्षेत्रों में रहकर भी उन्होंने कभी थाना में बैठना स्वीकार नहीं किया। पूरी जिंदगी उन्होंने एक पैसा कभी किसी गरीब से नहीं लिया। शायद यही वजह थी, प्रोमोशन मिलने के बावजूद भी उनकी हालत वही रही जो एक ईमानदार अधिकारी की होती है। विभाग के अंदर भी चलती राजनीति और उनके साथ हाते षडयंत्र से तंग आकर सब इंस्पेक्टर पद से त्यागपत्र देकर उन्होंने नौकरी छोड़ दी। ताउम्र एक पैसा किसी से न लेने वाले उस आदिवासी पुलिस अधिकारी ने अपना ही पेंशन निकालने के लिए पैसे की मांग किए जाने पर इस बात का भी विरोध किया। फलस्वरूप चार साल से उनका पेंशन भी अटका पड़ा है।
युवावस्था में मैराथन रेस दौड़ने के बाद अब वृद्धाव्स्था में भी उन्होंने अपनी दौड़ बरकरार रखी है। बैंगलूरू में आयोजित नेशनल मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2012 में उन्होंने 70 प्लस के वर्ग से पांच किलोमीटर की रेस में द्वितीय, 1500 मीटर की रेस में तृतीय और 2013 में इसी चैंपियनशिप में 10 किलोमीटर की रेस में तृतीय स्थान प्राप्त किया है। बैंगलूरू में नेशनल मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में द्वितीय स्थान प्राप्त करने के बाद उनका चुनाव एशियाड मास्टर चैंपियनशिप के लिए भी हुआ, जिसके लिए उन्हें ताईवान (चीन) जाना था। इसके लिए उन्होंने खेल विभाग से सहयोग भी मांगा था लेकिन किसी ने उन्हें सहयोग नहीं दिया।
2014 में गोवा में आयोजित नेशनल मास्टर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने अपने वर्ग में गोल्ड मेडल हासिल किया। उनके नक्शे कदम पर चलने वाले दो बेटों ने जिला, राज्य, राष्ट्रीय स्तर पर मेडल तो खूब बटोरे, नाम तो खूब कमाया लेकिन रोजगार नहीं पा सके। घर की हालत उस दिन की तरह ही रही जिस दिन उन्होंने गांव से पोटली पकड़ शहर का रूख किया था। आर्थिक तंगी की मार और बेरोजगारी से टूटते बेटे धीरे-धीरे शराब की चपेट में आने लगे थे। फिर इस नशे ने जैसे पूरे परिवार को तितर-बितर कर दिया। टूटते, बिखरते परिवार को किसी ने जिंदा रखा तो सिर्फ उनकी पत्नी पुष्पा अनिमा ने। पत्नी पुष्पा घर की तंगी दूर करने के लिए यहां-वहां काम करने लगी, गांव वापस लौटकर खेती-बारी संभाल लिया। इस बीच तीन बेटियां पिता, भाई के इन नामों के बीच हमेशा गुमनाम और उपेक्षित रहीं। पुष्पा ने इतना जरूर किया कि जमीन बंधक रख बच्चियों को पढ़ा दिया। लेकिन मां के कांधे से कुछ जिम्मेवारियां निकलकर 7-8 साल की कच्ची उम्र की बड़ी बेटी के कांधे पर भी अनायास ही आ पड़ा था। जिसने कभी अपना बचपना बच्चे की तरह नहीं जिया । गांव से दूर बहनों की जिम्मेदारी मां बनकर उठाती रहीं और गांव में मां भाईयों की जिम्मेदारी। शायद इसलिए रिश्तों में दरार पड़े और परिवारिक ताना-बाना बिखर गया। जिसने इन सारी परिस्थितियों के बीच खुद को संभाल लिया वो बाहर निकल आए और आज भी छूटे हुए बाकी टूट गए सदस्यों को बाहर निकालने की जद्ोजह्द में लगे हैं।
इन सबसे परे कोई विश्व मास्टर एथलीट बनने का वहीं बचपन का जुनून लिए आज भी 72 साल की उम्र में मनोहरपुर की सड़कों पर दौड़ रहा है। उनकी ईमानदारी, संघर्ष, मेहनत और जीवटपन को सलाम।
http://www.bhaskar.com/…/JHA-JAMS-athlete-jayprakash-run-20…

(वो आदिवासी मैराथन धावक ............ कोई और नहीं मेरे पिता जयप्रकाश केरकेट्टा हैं। मां पुष्पा अनिमा जो मेरी कविताओं और लेखन की हमेशा से प्रेरणा रही है। )

जसिन्ता केरकेट्टा
दिनांक - 14.8.2015

2 comments:

  1. MADAM, THIS IS SATISH SINGH FROM PRABHAT KHABAR LIFE @JAMSHEDPUR, I WANT TO TALK WITH YOU REGUARDING THIS MATTER.

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