Sunday, 16 November 2014

Jacinta Kerketta की फ़ोटो.


पहाड़ों पर उगे असंख्य बांसों का रहस्य
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मैं कुरूआ में सो रहा था
अचानक जमीन हिलने लगी...

देखा जमीन का एक टुकड़ा
जेसीबी मशीन के पंजों पर था
अपनी जमीन के टुकड़े के साथ
मैं भी लटका था मशीन पर
तब महसूस हुआ मुझे
अपनी जमीन सहित उखड़ जाने का दर्द,

मैंने देखा मेरे पूर्वजों की देह
कैसे टुकड़े-टुकड़े में
काटी जा रही थी और
उसका हर टुकड़ा
करोड़ों में बिक रहा था
खरीदारों की भीड़
नीचे शहर बन गई थी
और लगा जैसे मेरे ही शरीर का
हर हिस्सा कट-कट कर बिक रहा हो
मेरी आंखें, मेरा हृदय और सबकुछ,

मैंने पहाड़ों की चोटी पर से देखा
अपनी पीढि़यों का भविष्य
बांस बाजार लेकर बेचता भविष्य
और मैंने छुटते ही मशीन के पंजों से
उठा लिया बांस
इस बार ये बांस बाजार नहीं जाएंगे
जंगलों के अंदर अब बांस
बनेंगे हर हाथ का तीर-धनुष
और तब
पहली बार समझ में आया
मेरे पूर्वजों के रक्त से सिंचित
पहाड़ों पर उगे
असंख्य बांसों का रहस्य............।।
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- जसिन्ता केरकेट्टा
दिनांक - 10.10.2014



(कुरूआ - पहाड़ पर खेती के लिए घेरी गई जमीन - बाड़ी)

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