Sunday, 16 November 2014

नदी और लाल पानी


नदी और लाल पानी
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कोका-कोला बनाकर
तुमने उसे ''ठंडा का मतलब'' बताया
तो अब दुनियां को भी बताओ...

सारंडा के नदी-नालों में बहते
लाल पानी का मतलब क्या है?
नदी के तट पर चुंआ बनाकर, पानी
छानते-छानते थक चुकी जुंबईबुरू की
सुकुरमुनी को तुम क्या समझाओगे?
कौन सी उपमा देकर
नदी के इस लाल पानी की ओट में
अपने गुनाहों के रंग छुपाओगे,
पीकर जिसे मौत को गले लगा रही सोमारी
उसकी लाल आंखें सवाल पूछती हंैं तुमसे
कादो से सना लाल पानी
उतार देने को उसके हलक में
और कितने साल की लीज तुमने ले रखी है?
वो लोग भी कहां चले गए, जो कल तक
खूब करते थे लाल पानी की राजनीति
कितनी सशक्त थी वो रणनीति कि
आज तक रंग पीकर बह रही नदी
सवाल पूछ रही है उस शक्स से भी
जो सारंडा के विकास का दावा ठोक रहे,
देवियों की नग्न कलाकृति देखकर हुसैन को
तुम देश निकाले की सजा सुनाना चाहते थे
तो इंसानों की जिंदगी विकृत कर देने वाली
ऐसी हरकतों के लिए क्या दे सकोगे
सारंडा निकाले की सजा?
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जसिन्ता केरकेट्टा, रांची
दिनांक - 17.2.2014

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