Wednesday, 18 June 2014

तुम्हारे योद्धा होने की कहानी



तुम्हारे योद्धा होने की कहानी
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ओ सांवरी,
तुम्हारे माथे पर ये जख्म कैसा
कोई गाढ़ा लाल सा
जैसे जम गया हो रक्त
माथे पर तुम्हारे न जाने
कई सदियों से पुराने घाव सा
और तुम उसपर डाले फिरती हो
डहडहाता लाल रंग का सिंदूर
जिससे छुपा सको जख्म अपने
और तुम खुश हो जमाने को
देकर अपने सुहागन होने का प्रमाण,

देखो न गौर से सांवरी
उनके बदन पर तुम्हारे लिए
कौन-कौन से और कितने प्रमाण हंै ?
क्या कोई पुरानी निशानी
रख छोड़ी है उसने ?
जिसपर जमे परतो को खुरचकर
तुम्हारी नई पीढि़यां पढ़ सके, कभी
तुम्हारे योद्धा होने की कहानी,

ओ सांवरी,
उनके कई गुनाहों की
आड़ी-तिरछी हजार लकीरें
अपने बदन पर लिए तुमने
क्यों सीख लिया उसपर
रेशमी टुकड़े डालकर उन्हें छुपाना,

देखो इन सफेद कपड़ों के पीछे
तुम्हारे बदन पर हिंसा की खरोंचें हैं
उन खरोंचों से निकलते लाल खून को
तुम अपने मन के चुल्हे का अंगार बना लो
जिसपर खुद को तपाकर गढ़ सको एक खंजर
जिससे भविष्य की पहाड़ों पर खोद सको़
तुम्हारे जीवन जंग के मैदान में
हमेशा से एक योद्धा होने की कहानी.................।।

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