Wednesday, 18 June 2014

इंतजार



इंतजार
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वो चली गई मुझे छोड़कर
मुझसे दूर
क्योंकि उसे
किसी और से प्रेम था
मैं उसका सामान ढोकर
छोड़ने गया उसे स्टेशन
मगर
रोक नहीं सका चाहकर भी
क्योंकि
मुझे उससे बेहद प्रेम था,

मैंने कभी तय नहीं किया
अपने प्रेम की कोई सीमा
न उसके प्रेम के लिए भी
खींची कोई सीमा-रेखा,

रिश्ते का कोई नाम
नहीं था
यूं तो जमाने की नजर में
मगर कई पहलू थे रिश्ते में
कभी वो मां थी और बेटी भी
कभी सहेली थी, कभी उलझी पहेली भी
कभी साथी थी, कभी जीवनसाथी भी
पल में दुश्मन तो पल में दोस्त भी
हर बदलते रंग के लिए
उसके चेहरे पर होता था एक रंग
फिर बेरंग होती जिंदगी में
भरने को कई रंग,

किसी नासमझ बच्चे की तरह
उसका हर माह लड़ना
और
सप्ताह भर के लिए कट्टी कर लेना
इस विश्वास से
कि मैं रहूंगा हमेशा
उसके पास
रिश्तों के कई आयाम में से
फिर किसी न किसी रूप में
मगर आज चली गई
फिर कभी न लौटने के लिए,

जाने क्यों मैं
इस उम्मीद से
जाती हुई ट्रेन को
निहारता रहा ओझल होने तक
जैसे किसी पिता ने
अपनी बेटी को
जाने दिया हो
उसके प्रेमी के पास
या किसी साथी ने
रोका न हो उसे
अपने सपनों का पीछा करने से
या फिर इस यकीन के साथ
खामोश रहा कि वो लौटकर आएगी,

उसके सपनों के कुछ टुकड़े
जो गिर गए थे स्टेशन पर
उन टुकड़ों को मैंने
यादों की पोटली में
अनकहे प्रेम के धागों से
अब तक बांधकर रखा है
उन निशानियों की अंगूठी
उसकी अंगुली में डालकर
उसे बता सकूंगा कभी कि
हां मैंने उससे बहुत प्रेम किया है
रिश्ते के कई आयामों के बीच
हां कई रूपों में
शायद वो समझ सकेगी
देह से परे भी कहीं
होता है ऐसा प्रेम,

इंतजार कर रहा मैं
उस अंतिम क्षण तक
जब जीवन के खट्टे-मीठे,कडुवे
अनुभवों की बारिश में
भींगने लगे वो
तब भी रिश्ते के
कई पहलुओं में से
हां फिर किसी रूप में
मैं खड़ा रहूंगा उसके पास
हमेशा साथ होने के एहसासों की
एक मजबूत छतरी लिए,

यह विश्वास है मुझे कि
उम्र के किसी पड़ाव पर
जब उसके चेहरे पर
झुर्रियों की लकीरें
उसकी कहानी लिखेंगी
कहीं एकांत में ''गुमनाम'' ,
झुक जाएगी उसकी कमर
किसी हरी लचीली बांस सी
और
आंखों की घटती रोशनी
हर दिन जब
सांझ में डूबते हुए
अपने जीवन के सूरज को
पहाड़ों के पार
तलाशने को भटका करेंगी,

जीवन के अंतिम पहर में जब
वो चलेगी लड़खड़ाती हुई
कांपती, थरथराती हुई
उसकी उंगलियों के बीच फंसा
वो डंडा छूटकर
जब गिरने को होगा
तब मैं
थाम लूंगा उसका हाथ
देकर अपने कांधे का सहारा
और
हम देखेंगे पहाड़ी पर से
सूरज को
डूब कर फिर उगते हुए
साथ-साथ............।।

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