Wednesday, 18 June 2014

अपने होने का अर्थ

अपने होने का अर्थ
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वो कौन है अदृश्य शक्ति
जिसके अलग-अलग नामों पर
तुम सदियों से
बना रहे हुजूम के हुजूम
लोगों को अपना गुलाम ?
काली कोठरी सी जिंदगी के
किसी अंधेरे कोने में कैद हुए
लोग जी रहें हैं
सिलन और सड़ांध भरे
तुम्हारे कायदों के बीच
भूल कर अपने होने का अर्थ,

कुंठा की बदबूदार गलियों से
गुजरकर चुपचाप हर रोज
अपने कमरे में पहुंचकर
उम्मीदेां की टूटी खाट पर
गिर रहें हैं जैसे
जिंदगी से थक-हारकर
और
उसी अदृश्य अस्तित्व के नाम पर
तुम्हारे द्वारा बेची गई गोलियां
फांक रहें हैं मजबूरी में
दर्द की असली दवा समझकर
उनके खुद को जिंदा रखने की
अंधेरे में ऐसी कोशिश से
बचा हुआ है तुम्हारा अस्तित्व,

छोड़ दिया है मैंने अब
तुम्हारे बनाए रास्ते पर चलना
किसी गुलाम की तरह
तलाश रही अपने अंदर
गहरे कोई कोना जहां
खुद के सामने, खुद को रखकर
ठहर जाउ बिल्कुल खामोश,

ताकि इस ठहराव से
सहज उग आए
सन्नाटों के बीच
खेतों की मेढ़ पर
हल्की बारिश के बाद
हंस के पंखों की तरह
उग आए कासी के फूलों सी
अपने क्षणभंगुर जीवन में
स्थापित कर सकूं
अपने होने का अर्थ ।।

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