Saturday, 12 October 2013

एक राज है वह

एक राज है वह

मैंने देखा है उस
स्त्री को
जो गरीब जान
सहारा देती है
एक लड़की को
अनजान शहर में
खुद नौकरी न कर
बनाती है उसका भविष्य
और
उसके पति और
लड़की मिलकर
नौकरों सी हालत
कर देते हैं उसकी
उसके ही घर में
नौकरी कर वह लड़की
पूछती है
तुम हो इस घर में कौन
पति के सह पर घर में
वो करती है राज
तब भी वह स्त्री रहती है मौन,

मैंने देखा है उस स्त्री को
बदचलन कहकर पति से
पिटते हुए और
पूछे जाते हुए कर्इ सवाल
सिर्फ इसलिए कि
उसने पूछे थे
घर आए
पति के दोस्तों से
उनका हाल-चाल,


मैंने देखा है उस स्त्री को
कूड़ेदान से उठा कर घर लाते
अपने पति के
परायी स्त्री से संबंध की
निशानी को
सीने से लगाकर
अपना रक्त
दूध की तरह पिलाते हुए
बच्ची को
हंस कर दूर करती हुर्इ
दूसरी स्त्री की हर परेशानी को,


मैंने देखा है उस स्त्री को
लड़खड़ा कर ट्रेन से गिरते हुए
फिर भी उठकर चलती है
सब्जी बेचकर सौ रूपये कमाने को
यह जददोजहद है
सिर्फ
घर बैठे अपने जवान बेटों को
रोटी पकाकर खिलाने को,


मैंने देखा है उस स्त्री को
जो सारे पैसे लगा देती है
अस्पताल में पड़े पति को
बचाने को
बड़ी जुगाड़ से जो रखे थे
चंद पैसे
अपने अधूरे सपनों को
सजाने को,


मैंने देखा है उस स्त्री को
पति, पु़त्र, संपतित
कुछ भी तो
उसके पास नहीं
फिर भी वो स्त्री
जिंदगी से निराष नहीं
उसे अब भी अपने
निटठल्ले बेटों से
बेहद प्यार है
अब भी उसे
अपने पियंकड़ पति के
घर लौट आने का
इंतजार है,


कैसी उत्कट समर्पण के साथ
जीने का सित्रयों का
यह अंदाज है
मैं इसे शकित कहूं
या बेबसी
मुशिकल है समझ पाना
एक मां, एक पत्नी
एक औरत को
अपने अंदर समेटे कर्इ रहस्य
वो खुद सबसे बड़ी राज है।।

by-Jacinta kerketta

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