Saturday, 12 October 2013

क्यों नहीं उठता सवाल

क्यों नहीं उठता सवाल

चाचा कहें या मामा कहें
किसी को कहें तुम
या किसी को आप
फिर भी
कहां बदल पाया है
सित्रयों के प्रति
पुरूषों की जात
कोर्इ बताए कि
घर के अंदर
कैसे अस्मत लूट जाती है
जब कि दहलीज पर
अपनों का पहरा होता है
खामोषी की चादर
क्यों ओढ़ लेते हैं सब
जब लूटेरा
अपना ही कोर्इ सगा होता है
सित्रयों के लिए
घर के अंदर बाहर
नियम कायदों की दीवार है
यह दीवार दरकी तो
मच जाता है बवाल
उनके लिए
घर के अंदर बाहर
रिष्तों के इस पार
उस छोर पर
कौन से कायदे हैं
कौन सा पहरेदार है
और
इन कायदों के तोड़े जाने पर
क्यों
कोर्इ उठता नहीं सवाल
क्यों
मचता नहीं कोर्इ बवाल।


by-Jacinta kerketta




 

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