Saturday, 12 October 2013

बिन बयाही मां

बिन बयाही मां

जिंदगी भर उसने
अपने पैसे दोस्तो पर उड़ाए
मैं देखती रही
जिंदगी भर उसने
अपनी पत्नी की हंसी पर
गुस्से से दांत किटकिटाए
मैं देखती रही
जन्म देकर अपने ही
बच्चों की जिम्मेदारी
लाद दिया मेरे कंधों पर
मैं देखती रही
मैंने बच्चों को समेट लिया
और
कच्ची उम्र में
बिन बियाही मां बन गर्इ
उसने छोड़ दिया मुझे
जन्म देने के बाद
अपना हिस्सा न समझ कर
उसने बच्चों की
जिम्मेदारियों से
निजात पा ली
अपनी मर्जी पर
जीने के लिए
मैंने एक गहरी सांस ली
सोचा
चलो अच्छा हुआ
दुनियां जिसने नहीं देखा
वो बच्चे खुषनसीब होंगे
उनसे निजात पाकर
अपनी तरह
अपने सपनों को
जीने के लिए।।

by-Jacinta kerketta
 

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