Sunday, 27 October 2013

जमुनी रोको खुद को बिकने से



जमुनी रोको खुद को बिकने से

ओ जमुनी, देखो
तुम्हारे दर्द का हर दिन अब
सज रहा है, खबरों का बाजार
देस से लेकर देशों तक
तुम्हारे दर्द कैसे बिक रहे हैं, देखो
पति से तुम्हारे पिट जाने की
पड़ोसी के तुमसे दुष्कर्म की
प्रेमी से पाया अनचाहा गर्भ मिटाने की
हो जाने वाली तुम्हारी हत्या की
तुम्हारे शोषण और उत्पीड़न की
हर तरह की चटपटी, मसालेदार
तुम्हारे दर्द का हो रहा है व्यापार

तुम रेडियो, टीवी, इंटरनेट पर,
हर दिन की खबरों में
देखती हो, पढ़ती हो, सुनती हो
टकटकी लगाए बैठकर घर पर, मौन
यह सोचते हुए कि इन सबके बीच
कहीं तुम खुद हो गयी गौण
तुम जमीन कुरेदती हुयी सोचती हो
तुम दर्द हो, खबर हो, या हो इंसान
जमुनी तुम आखिर हो कौन ?

ओ जमुनी, देखो
कैसा ये हुजूम है लोगों का
तुम्हारे घर के बाहर
वे लिखना चाहते हैं तुमपर
कहानियां, कविताएं और किताबें
लेखनी लिए
तुम्हारे दरवाजों पर भटक रहे
तुमसे पूछे जा रहे
एक साथ सैकड़ों सवाल
तुम घबरायी हो
तुम्हारे शब्द हलक में अटक रहे
कुछ खुद को शुभचिंतक बताते हैं
आहिस्ता-आहिस्ता करीब आते हैं
तुम्हें दुनिया की नीति रीति समझाते हैं
तुम्हारा विश्वास जीत लेने के बाद
तुम जैसे ही भावुक होकर रोती हो
वो एक कुटिल मुस्कान लिए सफलता के
तुम्हारी बाहें धीरे-धीरे सहलाते हैं

तुम सकपकाती हो, डर जाती हो
तुम्हें समझना होगा हर छुअन को
इंसान नहीं उसकी नीयत को
क्योंकि हर दायरे के बाहर
बुरी नीयत वालों का डेरा है
तुम भटकती हो अपने शहर में
अपनी जाति में, अपने लोगों में
ऐसी नीयत वाले तुम्हें मिलेंगे हर कहीं
हर खेमे में उनका अपना बसेरा है

ओ जमुनी, उठो
पहचानो उनकी नीयत को
इन काले-सफेद बालों के पीछे
इन नीली-भूरी आंखों के नीचे
इन लंबे व्याख्यानों के बाद
रख लो बस इतना याद
तुम्हें बिना सोए चलना है मीलों
अनजाने बीहड़़ बियाबान जंगलों में
अपने नंगे पावों से बनाकर निशां
गढ़ने हैं नए रास्ते, अपने वास्ते

बाहर के कोलाहलों के बीच भी
सुनो जमुनी अपने अंतरमन की पुकार
कि अपने दर्द की ताप से
तुम बना लो एक मजबूत हथियार
जिसपर बांधकर सफलता के झंडे
शिखर तक पहुंचने को हो जाओ तैयार।।

-जसिन्ता केरकेटटा

1 comment:

  1. बाहर के कोलाहलों के बीच भी
    सुनो जमुनी अपने अंतरमन की पुकार
    कि अपने दर्द की ताप से
    तुम बना लो एक मजबूत हथियार
    जिसपर बांधकर सफलता के झंडे
    शिखर तक पहुंचने को हो जाओ तैयार।। --------बहुत खूब ...इस आह्वाहन को सलाम ...

    ReplyDelete